कर्म ही सर्वश्रेष्ठ है कर्म की ही विजय है

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हम जैसे है,वैसे हम दिखाई नहीं पड़ते

हम जैसे दिखते है, वैसे कभी नहीं थे.

ये सत्य है आज के मानव का

हम शांति चाहते है

हम खुशियाँ चाहते है

हम अपनों का प्यार चाहते है

हम दुनियाँ के नजरों में अच्छा बनना चाहते है

हम नि:स्वार्थ सेवा भी करना चाहते है,

लेकीन…………………..

हम विवेक भी खो देते है

हम बुराई भी कर लेते है

हम हत्या लुट भी कर लेते है….

आख़िर हम है कौन

हम तुम ही है,और तुम हम

यह संसार भी हम ही में समाया है.

अपेक्षा भी हम ही करते है

और उपेक्षा भी हम ही करते है

भटकते रहते है

सारी उम्र कुछ पाने के लिए

पाते भी है पर कई लोंग से बिछुड़ जाते है

सभी सपने भी देखते कई का पुरा हो जाता तो

बहुतों का टूट भी जाता है….

“कर्म ही सर्वश्रेष्ठ है कर्म की ही विजय है”

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एक रिश्ता आप से एक रिश्ता दिल से

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मैं खुद को पत्थर नहीं बना सका

रिश्ता जो दिल का है उसे कभी नहीं तोड़ सका

वक्त के इस तूफान में कई चेहरे बदल गए

मगर रिश्ता जो दिल से है वह बदल नहीं सका

बहुत मुश्किल से बनता है एक रिश्ता

कोई समझे या ना समझे

मगर मैने निभाया है हर रिश्ता

हां मै पत्थर नहीं बन सका

जैसी श्रद्धा वैसा रिश्ता

एक रिश्ता आप से एक रिश्ता दिल से….

                                                                                       By-Hemant Sarkar

 

एक आखरी ख़त

एक आखरी ख़त तेरे नाम

जिसमें मुहब्बत तो होगी

पर जज्बातों नहीं

जिसमे चाहत तो होगी

पर अफसाने नहीं

जिसमें प्यार भरी मोती तो होगी

लेकीन कोई कशिश नहीं….

हां आज एक आखरी ख़त लिखने जा रहा हु…

जिसमे मिलन की कोई बात नहीं

जिसमे देखने की कोई चाहत नहीं..

तुम तक जाने का हर वह रास्ता बंद कर

मै भी इस आखरी ख़त को अब बंद कर भेज दूंगा तुम्हारे पास

तुम रोना नहीं क्यों की वह आंसू अब मुझे दिखेगी नहीं…

सत्य तो केवल सत्य है

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सत्य तो केवल सत्य है खड़ा अपनी जगह

अविचल एक प्रकाश स्तम्भ

फूटती किरणें निर्मल सा

अनन्त तक,दिग-दिगन्त तक

साम्राज्य उसी का

पर आखें वाले अंधे हम देख नहीं पाते

ज़माने को उसे छु के देखने की ज़िद पे अड़े

और सत्य स्तम्भ सा खड़ा

एक दिवार है सत्य

और जूझते आपस में

अपने-अपने झूठ को “सच” साबित करने को….

स्वामी विवेकानंद

Swami-ji                                                        दुनियां के हर हिस्से में ऐसे लोग हुए हैं, जो अपनी बोध-क्षमता यानी महसूस करने की शक्ति को पांच इंद्रियों से आगे ले गए…. स्वामी विवेकानंद के बारे में एक दिलचस्प कहानी है….

वे पहले योगी थे जो पश्चिम गए और वहां जा कर उन्होंने हलचल मचा दी। यह घटना सौ साल पुरानी है । उन्होंने अपना पहला कदम शिकागो में रखा, और फिर वहां से वे यूरोप गए।

जब वे जर्मनी पहुंचे, तो वे वहां एक ऐसे आदमी के घर मेहमान बने, जो उस समय का मशहूर कवि और दार्शनिक था। रात के भोजन के बाद, वे दोनों अध्ययन कक्ष में बैठ कर बातचीत कर रहे थे। मेज पर एक किताब रखी थी, जो थोड़ी पढ़ी हुई लग रही थी। वे दार्शनिक महाशय उस किताब की बहुत तारीफ कर रहे थे, इसलिए स्वामी विवेकानंद बोले, “मुझे एक घंटे के लिए यह किताब दे दीजिए, जरा देखूं तो इसमें क्या है।” उन महाशय को बुरा लगा और थोड़े आश्चर्य के साथ उन्होंने पूछा, “क्या? एक घंटे के लिए ! एक घंटे में आप क्या जान लेंगे? मैं यह किताब कई हफ्तों से पढ़ रहा हूं, पर अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया हूं। इतना ही नहीं, यह किताब जर्मन भाषा में है, और आप जर्मन भाषा नहीं जानते,आप इसको पढ़ेंगे कैसे?” विवेकानंद ने कहा, “मुझे बस एक घंटे के लिए दे दीजिए; देखूं तो सही।” उन महाशय ने मजाक समझ कर वह किताब उनको दे दी।

विवेकानंद ने किताब ले कर अपनी दोनों हथेलियों के बीच दबा कर पकड़ ली और बस यूं ही एक घंटे तक बैठे रहे। फिर उन्होंने किताब लौटा दी और कहा, “इस किताब में कुछ खास नहीं है।” उन महाशय ने सोचा कि यह तो आला दर्जे का अहंकार है। ये किताब खोल भी नहीं रहे, यह उस भाषा में है जो इनको आती ही नहीं, और ये इस पूरी किताब के बारे में अपनी राय दे रहे हैं! वे महाशय बोले, “बिलकुल बेकार की बात है।” विवेकानंद ने कहा, “आप मुझसे किताब के बारे में कुछ भी पूछ लीजिए। बोलिए, आप कौन-से पेज के बारे में जानना चाहते हैं?” उन महाशय ने जो भी पेज संख्या बताई, विवेकानंद ने उसी वक्त पूरे पेज का एक-एक शब्द उनको सुना दिया। उन्होंने किताब खोली ही नहीं, बस, उसे दोनों हथेलियों के बीच पकड़े रहे। पर वे किसी भी पेज को इसी तरह सुना देते। उन महाशय को बिलकुल यकीन नहीं हो पाया। उन्होंने कहा, “यह क्या है? किताब खोले बिना और वह किताब भी उस भाषा की जो आपको नहीं आती, आप यह सब कैसे बता सकते हैं?” तब विवेकानंद ने कहा, “इसीलिए तो मैं विवेकानंद हूं।” ‘विवेक’ का मतलब बोध होता है। उनका असली नाम नरेन था। इसीलिए उनका नाम था ‘विवेकानंद’, क्योंकि उनके पास ऐसी विशेष बोध-क्षमता थी।

#sadhguru

प्रेम अपने आपसे प्रेम अपने जीवन से जब

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कुछ आदते आज से ही हम अपने जीवन में ले आए तो जीना बहुत आसान हो जाएगा

इस वयस्त जीवन में कुछ तनाव कम हो सकते है…..

1.Successful People Plan Their Day Before Going to Sleep

सफल लोगों की यह बहुत ही खास आदत है की वह अपना दिन एडवांस में ही प्लान कर लेते है, जी हाँ वह अपना पूरा दिन अगली रात ही प्लान कर लेते है की कल क्या – क्या करना है, कौन सा काम ज्यादा इम्पोर्टेंट है, कौन सा काम किस समय करना है और कब तक ख़तम कर लेना है ।

वे यह सब अपनी डायरी में नोट कर लेते है और इनके इस प्लानिंग की वजह से वह अपना दिन प्लान के मुताबिक शुरू और ख़तम करते है जिससे वे अपने समय का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर पाते है और इस वजह से उनका पूरा दिन ज्यादा सार्थक साबित होता है

हर रात 5 – 6 ऐसे काम जो आप कल करना चाहते हो उसे अपनी डायरी में लिख ले ।

सुबह उठते ही उसमे से जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण काम है उसे पूरा करने में लग जाए ।

हर शाम बैठ के अपने पूरे दिन का विश्लेषण करे की आपने आज जो अपनी डायरी में लिखे थे उसमे से कितने काम किये और कोई काम छूट तो नहीं गया ।

2.यह बहुत सारे रिसर्च और स्टडीज में भी साबित हो चुका है की सुबह जल्दी उठने वाले लोग देर से उठने वाले लोगो से मानसिक और शारीरिक रूप से ज्यादा चुस्त और फुर्तीले होते है ।

सुबह जल्दी उठना यह सब Successful people में समान आदत है और यह बहुत ही जबरदस्त कारगर आदत (Habit) है क्योंकि आप जल्दी उठकर ना सिर्फ अपने दिन के Working hour बढ़ा सकते है बल्कि आप एक नयी ताजगी और एनर्जी का एहसास भी प्राप्त कर सकते है ।

अगर आप सिर्फ 1 घंटा जल्दी उठते है तो साल में आपके पास काम करने के लिए अतिरिक्त 365 घंटे होंगे और यह 365 घंटे पूरे दो हफ्ते और तीन दिन एक्स्ट्रा समय हो जायेंगे और इतने समय में आप 4 से 5 नयी चीजें सिख सकते है ।

सफल लोग सुबह जल्दी उठकर अपने काम पर लग जाते है और जब तक हम अपने काम पर जाते है वे अपना आधा काम भी ख़तम कर लेते है और इस तरह वह अपने समय से आगे चलते है और अच्छे परिणाम हासिल करते है ।

आज आप जिस भी समय पर उठते है कल से उससे 1 घंटा जल्दी उठने का अलार्म सेट कर ले ।

अलार्म टाइम पे उठने के लिए जब भी अलार्म बजे तब उसे ऑफ करने के बजाय तुरंत अपने बिस्तर से उठ जाए और खुद से कहे सुबह जल्दी उठना बहुत ही जरूरी ही है क्योंकि हर सफल लोग (Successful people) यह करते है और मैं भी एक सफल इंसान (Successful person) बनना चाहता हूँ ।

सुबह जल्दी उठकर बिना समय बर्बाद किये अपने काम पर लग जाए ।

#श्रोत सूत्र #Aasaanhai