हर किसी के दिल में एक पीड़ा होती है
कोई कहता तो कोई कुछ भी नहीं कहता
उसका अंतरमन कुछ कहने नहीं देता
एक पीड़ा अपने अन्दर छुपाये रहता.
और छुपाये भी क्यों नहीं
आज कल किसी को सुनने का वक़्त नहीं मिलता
बेटा को माँ पिता के पास बैठने का वक़्त नहीं
भाई को भाई से कुछ मतलब नहीं
बहन को विदा कर उससे अब कोई नाता रिश्ता नहीं
जब अपने ही अपनों का दर्द नहीं बाटता
सभी अपने अपने भविष्य बनाने में लगा
उसे यह नहीं पता की जब वर्तमान मेरा सही होगा तो भविष्य इससे भी अच्छा होगा
फिर भी सभी अपने अपने भविष्य बनाने के लिए
एक दुसरे को कुचल कर सभी को पीछे छोड़ कर बढ़ रहा उस मंजिल की तरफ
पर क्या उसे ये पता है वहा जीवन का एक “सच” उसका इंतजार कर रहा है….
वहा सब सुख तो मिलेगा पर अपने नहीं मिलेगे.
ढूंढेगे बहुत जाओगे आपने उस खंडहर घर में
और ढूंढेगे कभी इस कमरे में कभी उस कमरे में
पर किसी को नहीं ढूंढ पाओगे…किसी को नहीं ढूंढ पाओगे….|